विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज
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रुद्राष्टाध्यायी पाठ और गायत्री मन्त्र

गायत्री मन्त्र के पाठ-विधान का शास्त्रीय निर्णय: स्वाध्याय और जप की मर्यादा

इतने स्पष्ट स्मार्त-प्रमाणों, श्रौतसूत्रों और आर्ष-वचनों के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति या कर्मकाण्डी गायत्री मन्त्र का सस्वर पाठ करने का दुराग्रह करता है, तो अमरकोश की शब्दावली में ऐसे विवेकहीन आचरण के लिए ‘अनडुह्’ (शास्त्रीय मति-हीनता) शब्द ही चरितार्थ होता है। शास्त्र का प्रकाश केवल विवेकियों के लिए है; जो प्रत्यक्ष प्रमाणों को देखकर भी न समझें, उनके लिये मौन रहना ही उत्तम पक्ष कहा गया है।

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ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचन

🏛️ ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचन

🏛️ ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचनसनातन धर्म और वैष्णव परंपराओं में ठाकुरबारी, मठ या मंदिर केवल पूजा-पाठ के स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान और सामाजिक आचरण के जीवंत केंद्र रहे हैं। समय के साथ इन संस्थाओं के स्वरूप और इनके प्रबंधकों (महंत) एवं पुजारियों की योग्यताओं को…

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आडंबर से अध्यात्म तक: आज के पूजन-यज्ञ और शास्त्रीय कसौटी

आडंबर से अध्यात्म तक: आज के पूजन-यज्ञ और शास्त्रीय कसौटी

क्या आधुनिक युग के भव्य और शोर-शराबे से भरे धार्मिक आयोजन वास्तव में सात्त्विक हैं? जानिए श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस की कसौटी पर आज के पूजन-यज्ञों का शास्त्रीय परिष्करण।

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सनातन की ओर

संक्षिप्त मंच परिचय

‘सनातन की ओर’ मात्र एक मंच नहीं, बल्कि आधुनिक युग में सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करने का एक पावन संकल्प है। यह मंच परम पूज्य लेखक – विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज की प्रसिद्ध पुस्तक “सनातन की ओर” के दिव्य विचारों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य…

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