विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज
ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

​”ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी शब्दों में क्या अंतर है? ‘मंत्रद्रष्टा’ का वास्तविक शास्त्रीय और वैज्ञानिक अर्थ क्या है? जानिए वेदों, निरुक्त, वायु पुराण और सुश्रुत संहिता के आलोक में ऋषित्व के वास्तविक पदानुक्रम—राजर्षि से लेकर ब्रह्मर्षि तक की यात्रा। यह शोधपरक आलेख स्पष्ट करता है कि ऋषित्व कोई सामाजिक उपाधि या मठों का वैभव नहीं, बल्कि चेतना की वह पराकाष्ठा है जहाँ विज्ञान और अध्यात्म का मिलन होता है। क्या कलियुग में ऋषि बनना संभव है? प्रामाणिक उत्तर के लिए इस आलेख को पूरा पढ़ें।”

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शंका से समाधान : दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे

शंका से समाधान : दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे

शंका से समाधान : श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के प्रामाणिक प्रसंगों के माध्यम से जानिए कि कैसे आज का आधुनिक युवा (पार्थ) अपने मानसिक तनाव और अवसाद को केवल अपना नजरिया बदलकर दूर कर सकता है। दृष्टिकोण बदलो पार्थ, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे!”

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शंका समाधान: क्या सनातन धर्म प्रगति, आधुनिकता और विज्ञान का विरोधी है?

शंका समाधान: क्या सनातन धर्म प्रगति, आधुनिकता और विज्ञान का विरोधी है?

“क्या सनातन धर्म सचमुच आधुनिकता का विरोधी है या यही आधुनिक विज्ञान का मूल आधार है? जानिए कैसे हमारे प्राचीन ग्रंथों में न्यूटन से पहले गुरुत्वाकर्षण, आधुनिक विज्ञान से पहले सूर्य-पृथ्वी की दूरी और आज के ‘Sustainable Development’ से पहले पर्यावरण संरक्षण का सटीक ज्ञान मौजूद था। यह आलेख रूढ़िवादिता के भ्रम को तोड़कर सनातन की प्रगतिशील और वैज्ञानिक चेतना को प्रामाणिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करता है।”

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