विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज

सनातन की ओर

ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचन

🏛️ ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचन

🏛️ ठाकुरबारी में सेवा और महंत पद का शास्त्रीय स्वरूप: एक विस्तृत विवेचनसनातन धर्म और वैष्णव परंपराओं में ठाकुरबारी, मठ या मंदिर केवल पूजा-पाठ के स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान और सामाजिक आचरण के जीवंत केंद्र रहे हैं। समय के साथ इन संस्थाओं के स्वरूप और इनके प्रबंधकों (महंत) एवं पुजारियों की योग्यताओं को…

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"दीक्षा-भेदेऽपि गृह-एकता: एकादशी एवं जन्माष्टम्यादि व्रतों में संप्रदाय-द्वंद्व का शास्त्रीय समाधान"

“दीक्षा-भेदेऽपि गृह-एकता: एकादशी एवं जन्माष्टम्यादि व्रतों में संप्रदाय-द्वंद्व का शास्त्रीय समाधान”

अजयमेरु (अजमेर) एवं मयराष्ट्र (मेरठ) के शांकरपरम्परा-निष्ठ प्रबुद्ध गृहस्थों की धर्मशास्त्रीय समस्या का प्रामाणिक समाधानपीठिका: समस्या का उद्गम और प्राकट्यसनातन धर्म की शास्त्रीय परंपरा में शंकाओं का समाधान और गंभीर विमर्श सदैव विद्वानों के माध्यम से ही प्रवाहित होता आया है। अजयमेरु और मयराष्ट्र के दो संभ्रांत एवं विद्वान् गृहस्थों के सम्मुख उपस्थित यह धर्मशास्त्रीय…

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ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

​”ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी शब्दों में क्या अंतर है? ‘मंत्रद्रष्टा’ का वास्तविक शास्त्रीय और वैज्ञानिक अर्थ क्या है? जानिए वेदों, निरुक्त, वायु पुराण और सुश्रुत संहिता के आलोक में ऋषित्व के वास्तविक पदानुक्रम—राजर्षि से लेकर ब्रह्मर्षि तक की यात्रा। यह शोधपरक आलेख स्पष्ट करता है कि ऋषित्व कोई सामाजिक उपाधि या मठों का वैभव नहीं, बल्कि चेतना की वह पराकाष्ठा है जहाँ विज्ञान और अध्यात्म का मिलन होता है। क्या कलियुग में ऋषि बनना संभव है? प्रामाणिक उत्तर के लिए इस आलेख को पूरा पढ़ें।”

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आडंबर से अध्यात्म तक: आज के पूजन-यज्ञ और शास्त्रीय कसौटी

आडंबर से अध्यात्म तक: आज के पूजन-यज्ञ और शास्त्रीय कसौटी

क्या आधुनिक युग के भव्य और शोर-शराबे से भरे धार्मिक आयोजन वास्तव में सात्त्विक हैं? जानिए श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस की कसौटी पर आज के पूजन-यज्ञों का शास्त्रीय परिष्करण।

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शंका से समाधान : दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे

शंका से समाधान : दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे

शंका से समाधान : श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के प्रामाणिक प्रसंगों के माध्यम से जानिए कि कैसे आज का आधुनिक युवा (पार्थ) अपने मानसिक तनाव और अवसाद को केवल अपना नजरिया बदलकर दूर कर सकता है। दृष्टिकोण बदलो पार्थ, दृश्य स्वतः बदल जाएंगे!”

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शंका समाधान: क्या सनातन धर्म प्रगति, आधुनिकता और विज्ञान का विरोधी है?

शंका समाधान: क्या सनातन धर्म प्रगति, आधुनिकता और विज्ञान का विरोधी है?

“क्या सनातन धर्म सचमुच आधुनिकता का विरोधी है या यही आधुनिक विज्ञान का मूल आधार है? जानिए कैसे हमारे प्राचीन ग्रंथों में न्यूटन से पहले गुरुत्वाकर्षण, आधुनिक विज्ञान से पहले सूर्य-पृथ्वी की दूरी और आज के ‘Sustainable Development’ से पहले पर्यावरण संरक्षण का सटीक ज्ञान मौजूद था। यह आलेख रूढ़िवादिता के भ्रम को तोड़कर सनातन की प्रगतिशील और वैज्ञानिक चेतना को प्रामाणिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करता है।”

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