गायत्री मन्त्र के पाठ-विधान का शास्त्रीय निर्णय: स्वाध्याय और जप की मर्यादा
इतने स्पष्ट स्मार्त-प्रमाणों, श्रौतसूत्रों और आर्ष-वचनों के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति या कर्मकाण्डी गायत्री मन्त्र का सस्वर पाठ करने का दुराग्रह करता है, तो अमरकोश की शब्दावली में ऐसे विवेकहीन आचरण के लिए ‘अनडुह्’ (शास्त्रीय मति-हीनता) शब्द ही चरितार्थ होता है। शास्त्र का प्रकाश केवल विवेकियों के लिए है; जो प्रत्यक्ष प्रमाणों को देखकर भी न समझें, उनके लिये मौन रहना ही उत्तम पक्ष कहा गया है।
