विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज
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रुद्राष्टाध्यायी पाठ और गायत्री मन्त्र

गायत्री मन्त्र के पाठ-विधान का शास्त्रीय निर्णय: स्वाध्याय और जप की मर्यादा

इतने स्पष्ट स्मार्त-प्रमाणों, श्रौतसूत्रों और आर्ष-वचनों के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति या कर्मकाण्डी गायत्री मन्त्र का सस्वर पाठ करने का दुराग्रह करता है, तो अमरकोश की शब्दावली में ऐसे विवेकहीन आचरण के लिए ‘अनडुह्’ (शास्त्रीय मति-हीनता) शब्द ही चरितार्थ होता है। शास्त्र का प्रकाश केवल विवेकियों के लिए है; जो प्रत्यक्ष प्रमाणों को देखकर भी न समझें, उनके लिये मौन रहना ही उत्तम पक्ष कहा गया है।

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ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

ऋषित्व का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक स्वरूप: एक प्रामाणिक विवेचन

​”ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी शब्दों में क्या अंतर है? ‘मंत्रद्रष्टा’ का वास्तविक शास्त्रीय और वैज्ञानिक अर्थ क्या है? जानिए वेदों, निरुक्त, वायु पुराण और सुश्रुत संहिता के आलोक में ऋषित्व के वास्तविक पदानुक्रम—राजर्षि से लेकर ब्रह्मर्षि तक की यात्रा। यह शोधपरक आलेख स्पष्ट करता है कि ऋषित्व कोई सामाजिक उपाधि या मठों का वैभव नहीं, बल्कि चेतना की वह पराकाष्ठा है जहाँ विज्ञान और अध्यात्म का मिलन होता है। क्या कलियुग में ऋषि बनना संभव है? प्रामाणिक उत्तर के लिए इस आलेख को पूरा पढ़ें।”

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